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सारगैसो सागर (Sargasso Sea) क्या है ?

  सारगैसो सागर  उत्तरी अटलांटिक महासागर में उत्तरी विषुवत्त रेखीय जल धारा, गल्फ स्ट्रीम जल धारा एवं कनारी जल धारा द्वारा घिरा हुआ एक शांत क्षेत्र है, इस क्षेत्र का विस्तार 20 से 40 डिग्री उत्तरी अक्षांश एवं 35 से 75 डिग्री पश्चिमी देशांतर के मध्य  है . यहाँ पर शान्त एवं गतिहीन जल राशि पायी जाती है . जिसमे सारगैसम घासें फैली है, इसलिए उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित इस क्षेत्र को सारगैसों सागर कहा जाता है .  सारगैसों सागर पछुआ हवाओं (Westerlies Winds) तथा व्यापारिक हवाओं (Trade Winds) के संक्रमण मण्डल (Transitional Zone) के मध्य स्थित है तथा यहाँ पर प्रतिचक्रवत्तीय पवन संचार के कारण हवाएं मंद गति से चलती है . जिस कारण इस क्षेत्र के  सागरीय जल का अन्य सागरीय जल के साथ मिश्रण नहीं हो पाता है . इस कारण इस क्षेत्र में अटलांटिक महासागर की सर्वाधिक लवणता पायी जाती है . यह पर औसत वार्षिक तापमान 26 सेल्सियस तक पाया जाता है .  सारगैसों सागर का क्षेत्रफल 11000 वर्ग किलोमीटर है तथा इसके आस-पास कई मीलो तक जमीन देखने को नहीं मिलती है . इसलिए इसे बिना तट (Coast) का सागर...

घाटियाँ (Valleys) क्या होती है ?

घाटियाँ ( Valleys) धरातल पर पर्वतो ,  पठारो एवं मैदानो के बीच हिमानी ,  भू-गतियों एवं नदियों द्वारा निर्मित्त अवतलित स्थानो को घाटी ( Valleys)  कहा जाता है । उत्पत्ति ,  अवस्था ,  स्वरूप एवं स्थिति के आधार पर घाटियों को कई प्रकार मे विभक्त किया जाता है । जो इस प्रकार है – 1.  V  आकार की घाटी ( V   Shaped   Valley)  – नदियाँ अपनी यौवनावस्था मे पर्वतीय क्षेत्रो मे लम्बवत अपरदन ( Vertical   Erosion)  द्वारा गहरी एवं संकीर्ण घाटियों का निर्माण करती है । जिनका आकार अँग्रेजी वर्णमाला के अक्षर  V  आकार का होता है ,  इसलिय इस प्रकार की घाटियों को  V  आकार की घाटी के नाम से अभिहित किया जाता है । 2.  U   आकार की घाटी ( U   Shaped   Valley)   -  U   आकार की घाटी का निर्माण हिमनद क्षेत्रो मे अपरदन से होता है ।  V   आकार की घाटियों मे हिमानी द्वारा शैले घिसती जाती है और शैल बाहुओ के अग्र भाग एवं तीव्र धारें घिस-घिस कर चिकने और सीधे हो जाते है । जिससे ये घाटियाँ...

महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents)

  महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents) सागर तल की विशाल जलराशि जब एक निश्चित दिशा मे सामान्य गति से प्रवाहित होती है, तो उसे महासागरीय धारा कहते है । धाराओं की गति, आकार तथा दिशा मे पर्याप्त अंतर होता है । जिस आधार पर धाराओं को निम्नलिखित प्रकार मे विभाजित किया जा सकता है - 1. प्रवाह (Drift) -  जब हवा के वेग से प्रभावित होकर सागर की सतह का  जल आगे की ओर  अग्रसर होता है तो उसे प्रवाह (Drift) कहते है । इसकी गति मन्द होती है तथा केवल ऊपरी जल ही गतिशील होता है । उदाहरण - उत्तरी एवं दक्षिण अटलांटिक प्रवाह ।  2. धारा (Current) - जब सागर का जल एक निश्चित सीमा के अंतर्गत निश्चित दिशा की ओर तीव्र गति से प्रवाहित होता है तो उसे धारा कहते है । इसकी गति प्रवाह से अधिक होती है । उदाहरण - केनारी की धारा एवं एल-निनों की धारा आदि । 3. विशाल धारा (Stream) -  जब सागर का जल धरातल की नदियों की भांति एक निश्चित दिशा मे गतिशील होता है तो उसे विशाल धारा या Stream कहा जाता है । इसकी गति प्रवाह एवं धारा से अधिक होती है । उदाहरण - गल्फ स्ट्रीम ।  महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति के का...